सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को बताया अवैध, राष्ट्रपति को नहीं मिला अधिकार

न्यूयॉर्क: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया है। ये टैरिफ अप्रैल 2025 में लगाए गए थे और इसे आपातकालीन शक्तियों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लागू किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। समाचार एजेंसी AP के अनुसार, यह मामला ट्रंप के एजेंडे का पहला प्रमुख मुद्दा था, जो सीधे सर्वोच्च अदालत तक गया। अदालत ने कहा कि टैरिफ का इस्तेमाल केवल राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात स्थिति के बहाने नहीं किया जा सकता और इसके लिए विधायी अनुमोदन आवश्यक है।

ट्रंप ने अपने टैरिफ को लेकर कहा था कि इससे अमेरिका को 600 अरब डॉलर से अधिक राजस्व मिला है। उनका दावा था कि यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है और देश को विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता से बचाता है। ट्रंप ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर सही ठहराने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से अमेरिका में व्यापार और टैरिफ नीति पर राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच संतुलन को फिर से स्पष्ट किया गया है। अदालत ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर व्यापार नीति में अत्यधिक राष्ट्रपति अधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

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