- बेटे-बेटी का भेद मिटाने से ही आएगा सामाजिक परिवर्तन: प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव
दुर्ग। शासकीय डॉ. वामन वासुदेव पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का भव्य समापन हुआ। ‘लैंगिक समानता के राजदूत के रूप में संकाय सदस्यों का उन्नयन’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में किया गया।
पद्मश्री शमशाद बेगम का हुआ सम्मान
समापन समारोह की मुख्य अतिथि पद्मश्री शमशाद बेगम रहीं। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार द्वारा उनका आत्मीय सम्मान किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं, लेकिन समाज में अब भी उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है। उन्होंने बताया कि समाज में नारियों को सम्मान दिलाने के लिए ‘महिला कमांडो’ की स्थापना की गई है, जो छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सक्रियता से जागरूकता फैला रही हैं।

घर से शुरू हो प्रयास: डॉ. श्रीवास्तव
प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने जोर देते हुए कहा कि लैंगिक समानता की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए। यदि माता-पिता घर में ही बेटा-बेटी के अंतर को समाप्त कर दें, तो समाज में स्वतः परिवर्तन आएगा। उन्होंने माँ को परिवार की प्रथम गुरु बताते हुए समाज सुधार की महत्वपूर्ण कड़ी करार दिया।

शिक्षा है परिवर्तन का सशक्त माध्यम
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रेशमा लकिश ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत हथियार है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को ‘जेंडर एंबेसडर’ के रूप में तैयार किया गया है, ताकि वे समाज में सकारात्मक संदेश फैला सकें।

कार्यक्रम में यशेश्वरी ध्रुव ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। इस अवसर पर डॉ. अमिता सहगल, डॉ. अलका जैन, डॉ. मीनाक्षी अग्रवाल, डॉ. रीमारानी दास, जनभागीदारी समिति के सदस्य, सहायक प्राध्यापक एवं समस्त कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मिलिंद अमृतफले ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. सुषमा यादव द्वारा किया गया।