दुर्ग। न्याय व्यवस्था का वास्तविक उद्देश्य केवल निर्णय सुनाना नहीं, बल्कि पीड़ित पक्ष को समयबद्ध और प्रभावी न्याय प्रदान करना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए जिला न्यायालय परिसर, दुर्ग के नवीन सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण विधिक सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार का मुख्य विषय “Speedy Trial in Civil Cases and The Succession Act” (सिविल प्रकरणों में त्वरित विचारण एवं उत्तराधिकार अधिनियम) रहा।
त्वरित न्याय: न्यायपालिका की प्राथमिकता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने अपने संबोधन में ‘स्पीडी ट्रायल’ (त्वरित विचारण) की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिविल प्रकरणों में होने वाला अनावश्यक विलंब न केवल पक्षकारों की कठिनाइयां बढ़ाता है, बल्कि न्यायपालिका के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करता है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे उत्तराधिकार संबंधी मामलों में विधिक स्पष्टता और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
सेमीनार में आमंत्रित वक्ताओं ने सिविल प्रकरणों के निष्पादन की बारीकियों और उत्तराधिकार अधिनियम के जटिल प्रावधानों पर व्यावहारिक जानकारी दी। वक्ताओं ने कोर्ट रूम में आने वाली रोजमर्रा की विधिक समस्याओं और उनके त्वरित समाधानों पर प्रकाश डाला, जिससे प्रशिक्षु और वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नई दिशा मिली।
जनोन्मुख न्याय की ओर कदम
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के इस प्रयास को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, त्वरित और जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।