सेवा तीर्थ’ से नई कार्य-संस्कृति की शुरुआत, कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम संकल्प

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक को सरकार ने नई कार्य-संस्कृति और प्रशासनिक दृष्टिकोण की औपचारिक शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि शुभ तिथि पर आयोजित इस बैठक में देशहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। साथ ही मंत्रिमंडल ने यह संकल्प दोहराया कि नया परिसर केवल एक भवन नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतीक होगा, जहां से लिए जाने वाले हर निर्णय का केंद्रबिंदु देश के 140 करोड़ नागरिक होंगे।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ‘सेवा तीर्थ’ स्वदेशी सोच और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय का प्रतीक है। यहां से संचालित शासन-प्रणाली संविधान के मूल्यों—गरिमा, समानता और न्याय—पर आधारित होगी। मंत्रिमंडल ने पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

सरकार ने कहा कि यह नया परिसर औपनिवेशिक काल की अस्थायी संरचनाओं की जगह विकसित किया गया है और इसे आत्मनिर्भर व आत्मविश्वासी भारत के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा, लेकिन अब नई व्यवस्थाओं के साथ प्रशासनिक कार्यों को अधिक आधुनिक और प्रभावी ढंग से संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

बैठक के दौरान हाल के वर्षों में सरकार की प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर लाने, आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से बड़े पैमाने पर शौचालय निर्माण जैसे कदमों ने सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान और नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजनाओं को भी रेखांकित किया गया।

मंत्रिमंडल ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की अवधारणा के तहत जीएसटी, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों को प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में अहम बताया। साथ ही लक्ष्य रखा गया कि सुधारों की गति को बनाए रखते हुए भारत को आने वाले समय में विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया जाए।

बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा गया कि ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित नई कार्य-प्रणाली देश को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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