सीमा पार तनाव चरम पर, अफगान कार्रवाई के बाद काबुल में गूंजे धमाके

काबुल : काबुल से लेकर सीमा के सुदूर पहाड़ी इलाकों तक एक बार फिर गोलाबारी की गूंज सुनाई दी है। पाकिस्तान ने शुक्रवार तड़के अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत दक्षिणी प्रांत कंधार और दक्षिण-पूर्वी पकतिया में हवाई हमले किए। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों की पुष्टि की है।

हमले और जवाबी कार्रवाई

बताया जा रहा है कि काबुल में कम से कम तीन धमाकों की आवाज सुनी गई, हालांकि शुरुआती घंटों में नुकसान या हताहतों की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसने सीमा पार पाकिस्तान की सैन्य चौकियों पर जवाबी हमला किया है।

अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई पाकिस्तान के हालिया हवाई हमलों के प्रतिउत्तर में की गई। वहीं पाकिस्तान ने अफगान दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसके ठिकानों पर कब्जे की बात निराधार है और उसकी कार्रवाई आतंकवादियों के खिलाफ थी।

डूरंड रेखा पर बढ़ता तनाव

दोनों देशों के बीच 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है, लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। अफगानिस्तान इस सीमा को औपचारिक मान्यता नहीं देता। हालिया घटनाओं ने इस संवेदनशील इलाके को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

युद्धविराम पर सवाल

कतर की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। नवंबर में हुई शांति वार्ताएं भी किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच सकीं। सीमा पर बीच-बीच में हो रही गोलीबारी ने हालात और नाजुक बना दिए हैं।

हताहतों पर अलग-अलग दावे

अफगानिस्तान ने दावा किया है कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई को बंदी बनाया गया। दूसरी ओर पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार के अनुसार, दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 36 अफगान लड़ाके ढेर किए गए। दोनों पक्षों के आंकड़ों में भारी अंतर है, जिससे वास्तविक स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

इस बीच, एंतोनियो गुतारेस ने सीमा पार झड़पों पर चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है।

पृष्ठभूमि में आतंकी संगठनों का मुद्दा

पाकिस्तान लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूच अलगाववादी संगठनों पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाता रहा है। इस्लामाबाद का दावा है कि टीटीपी अफगानिस्तान की जमीन से संचालित होता है, जबकि काबुल इन आरोपों से इनकार करता आया है।

लगातार बढ़ती झड़पों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दोनों पड़ोसी देश कूटनीति के रास्ते लौटेंगे या सीमा पर तनाव और गहराएगा।

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