दुर्ग | छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी दुर्ग आज पूरी तरह से ‘श्याम रंग’ में सराबोर नजर आई। फाल्गुन एकादशी के पावन अवसर पर शहर में पहली बार प्रदेश की सबसे बड़ी भव्य निशान यात्रा निकाली गई। इस अलौकिक यात्रा में 1300 से अधिक श्याम प्रेमियों ने हाथों में निशान ध्वज थामकर पदयात्रा की, जिससे पूरा शहर भक्ति के माहौल में डूब गया।
सत्तीचौरा से कादंबरी नगर तक गूंजे जयकारे
निशान यात्रा का शुभारंभ गंजपारा स्थित श्री सत्तीचौरा मां दुर्गा मंदिर से हुआ। यात्रा से पूर्व मंदिर में बाबा श्याम की अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई, विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात भक्तों का हुजूम हाथों में लाल, पीले और केसरिया ध्वज लेकर श्री श्याम मंदिर, कादंबरी नगर की ओर रवाना हुआ।

आकर्षक झांकियां और फूलों की वर्षा
आयोजन समिति के प्रमुख योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’ ने बताया कि इस ऐतिहासिक यात्रा में बाबा श्याम की मनमोहक चलित झांकी, भव्य रथ-बग्गी और राधा-कृष्ण के स्वरूप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। घोड़े और बग्गियों के साथ निकली इस यात्रा का नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। सड़क के दोनों ओर राहगीरों की भीड़ बाबा की एक झलक पाने के लिए लालायित दिखी।
शीश के दानी को अर्पित किए ‘विजय के प्रतीक’
मान्यता है कि धर्म की जीत के लिए अपना शीश दान करने वाले महाबलिदानी बाबा श्याम को ‘निशान’ चढ़ाना उनकी विजय का प्रतीक है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नारियल और मोरपंख से सजे इन निशानों को लेकर पदयात्रा करते हैं। कादंबरी नगर स्थित श्याम मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर अपने निशान अर्पित किए और बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

भक्ति में डूबा नारी और युवा शक्ति
इस भव्य आयोजन में शहर की सैकड़ों महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्याम भजनों की धुन पर नाचते-गाते भक्तों के उत्साह ने दुर्ग को ‘मिनी खाटू’ का स्वरूप दे दिया। देर शाम तक चले इस उत्सव ने दुर्ग के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।