ट्रंप की धमकी और मध्यपूर्व तनाव से शेयर बाजार में कोहराम, निवेशकों की 8 लाख करोड़ की दौलत डूबी

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच संभावित लंबी जंग की आशंकाओं ने सोमवार को वैश्विक और घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट ला दी। भारत समेत दुनिया भर के इक्विटी मार्केट्स में तेज बिकवाली देखी गई।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके असर से घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 में भारी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,387.55 अंकों (1.86%) की गिरावट के साथ 73,145.41 पर और निफ्टी 423.35 अंकों (1.83%) की गिरावट के साथ 22,691.15 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 72,977.34 और निफ्टी 22,634.55 तक फिसल गए थे।

निवेशकों की दौलत में भारी नुकसान
इस तेज गिरावट के चलते BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 8.15 लाख करोड़ रुपये घट गया। 20 मार्च को कुल मार्केट कैप 4.29 लाख करोड़ था, जबकि 23 मार्च को यह घटकर 4.20 लाख करोड़ रह गया।

क्यों मची बाजार में तबाही?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम है। ट्रंप ने ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ खोलने की चेतावनी दी, अन्यथा उसके ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की धमकी दी। इस खबर से ग्लोबल सप्लाई चेन में डर पैदा हुआ और कच्चा तेल (WTI Crude) $100 के करीब और ब्रेंट क्रूड $112.17 के पार पहुंच गया।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली
FII ने पिछले 16 कारोबारी दिनों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है, जो बाजार की कमजोरी को और बढ़ा रही है।

सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जिसमें सबसे अधिक दबाव Tata Steel, Mahindra & Mahindra और HDFC Bank के शेयरों पर देखा गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होगा और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आएगी, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

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