नई दिल्ली: शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के शहीदी दिवस पर सोमवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पार्लियामेंट स्ट्रीट स्थित आरसीएस परिसर में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इसके साथ ही यहां दोबारा तैयार किए गए ऐतिहासिक अदालत कक्ष का भी उद्घाटन किया गया। माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई हुई थी।
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख नेता और गणमान्य लोग शामिल हुए। इनमें कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविंद्र इंद्राज सिंह और कपिल मिश्रा के साथ ही भगत सिंह के परिवार से उनके पोते यादविंदर सिंह संधू भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि 23 मार्च का दिन देश के लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ दिन है। यह दिन हमें उन महान क्रांतिकारियों के सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक परिसर में उन यादों को फिर से जीवंत होते देखना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण केवल निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह देश की अमूल्य विरासत को सहेजने का प्रयास है। इससे आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस स्थान का दौरा करें और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को करीब से महसूस करें।
समाज कल्याण एवं सहकारिता मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा कि जिस स्थान पर कभी इंकलाब के नारे गूंजते थे और जहां भगत सिंह की पेशी हुआ करती थी, उस इतिहास को संजोने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। यहां स्थापित की गई प्रतिमा युवाओं को भगत सिंह के विचारों, उनके साहस और उनके बलिदान से प्रेरणा लेने का अवसर देगी।
शहीदी दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा परिसर में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों का साहस, त्याग और देशभक्ति हर पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराते रहेंगे और उनका बलिदान हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।