नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव और उसके भारत की ऊर्जा आपूर्ति तथा राज्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई।
बैठक से पहले केंद्र सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि देश में ईंधन की कोई तत्काल कमी नहीं है। सरकार के अनुसार भारत के पास लगभग 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराकर अतिरिक्त ईंधन न खरीदने की अपील की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था स्थिर है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री ने बैठक में “टीम इंडिया मॉडल” पर जोर दिया, जिसका इस्तेमाल कोरोना महामारी के दौरान किया गया था। इस मॉडल के तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करती हैं। केंद्र सरकार आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करती है, जबकि राज्य सरकारें उनके प्रभावी वितरण की जिम्मेदारी संभालती हैं। कोरोना काल में जहां दवाइयों, मास्क और टेस्टिंग किट पर ध्यान था, वहीं वर्तमान परिस्थितियों में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता पर फोकस किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में ईंधन आपूर्ति को लेकर कुछ जगहों पर चिंता का माहौल बना है। कई राज्यों में अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं और कुछ लोग बड़ी मात्रा में ईंधन भरवाने पहुंच रहे हैं। इससे अन्य उपभोक्ताओं को अस्थायी परेशानी हो रही है। हालांकि सरकार ने दोहराया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
इस बैठक में उन पांच राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए, जहां जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी शामिल हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से पैदा हुए हालातों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।