दुर्ग। घर की चौखट, रसोई की जिम्मेदारी और रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच कहीं पीछे छूट गए बचपन को दुर्ग की महिलाओं ने आज फिर से जी लिया। पदमनाभपुर स्टेडियम में आयोजित अनोखे कार्यक्रम ‘बचपन का टिकट : चलव दीदी खेल खेले बर जाबो’ ने आज साबित कर दिया कि खेलने और मुस्कुराने की कोई उम्र नहीं होती।
पदमनाभपुर स्टेडियम आज केवल एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि यादों के मेले जैसा नजर आया। जहाँ कभी सन्नाटा रहता था, आज वहाँ:खो-खो की गूंज सुनाई दी.कबड्डी की हुंकार ने जोश भरा.रस्सा-कसी में महिलाओं का दमखम दिखा।चम्मच दौड़ की मस्ती ने बचपन की शरारतें ताजा कर दीं।

इस आयोजन के पीछे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय की सोच रही। उन्होंने महिलाओं को घरेलू थकान और मानसिक तनाव से बाहर निकालकर खुद के लिए जीने का एक खूबसूरत मौका दिया। कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन दुर्ग की ‘सखी सहेली महिला समूह’ द्वारा किया गया।
इस प्रतियोगिता में भागीदारी पूरी तरह निशुल्क रखी गई थी, जिसमें दो मुख्य आयु वर्ग (18 से 25 वर्ष और 25 वर्ष से अधिक) की महिलाओं ने हिस्सा लिया।
विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार: खेल में जीत हासिल करने वाली महिलाओं को पुरस्कृत भी किया गया।
उद्देश्य: हार-जीत से परे, इस आयोजन का मुख्य संदेश महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान लौटाना और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से रिचार्ज करना था।
दुर्ग से उठी यह पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को संदेश देती है कि जिम्मेदारियों के बीच खुद के ‘बचपन’ को जिंदा रखना जरूरी है। ‘बचपन का टिकट’ कार्यक्रम की यादें हिस्सा लेने वाली हर ‘दीदी’ के दिल में हमेशा ताज़ा रहेंगी।