सरकार की मजबूत फिस्कल पोजीशन से RBI को मिले बेहतर विकल्प: निर्मला सीतारमण

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणने कहा है कि देश की मजबूत वित्तीय स्थिति और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण Reserve Bank of India के पास नीतिगत फैसले लेने में अधिक लचीलापन उपलब्ध है। उनके अनुसार मजबूत आर्थिक आधार केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों और अन्य मौद्रिक उपायों पर निर्णय लेने के लिए बेहतर परिस्थिति प्रदान करता है।

राजकोषीय अनुशासन से बनी आर्थिक मजबूती

वित्त मंत्री ने National Institute of Public Finance and Policy के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में कहा कि पिछले लगभग दस वर्षों में अपनाए गए वित्तीय अनुशासन का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। सरकार के पास पूंजीगत निवेश को जारी रखने, जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता देने और मौद्रिक नीति के स्तर पर संभावित दर कटौती के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।

मौद्रिक नीति बैठक से पहले आया बयान

सीतारमण की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब Reserve Bank of India जल्द ही अपनी अगली मौद्रिक नीति समीक्षा का निर्णय घोषित करने वाला है। ऐसे में वित्त मंत्री का बयान आर्थिक नीति से जुड़े संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।

ऋण-से-जीडीपी अनुपात में सुधार की उम्मीद

उन्होंने बताया कि भारत का ऋण-से-जीडीपी अनुपात कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। साथ ही International Monetary Fund के आकलन के अनुसार आने वाले वर्षों में इसमें और गिरावट संभव है, जिससे देश की वित्तीय स्थिरता और मजबूत होगी।

विदेशी मुद्रा भंडार बना सुरक्षा कवच

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत के पास इतना विदेशी मुद्रा भंडार है कि उससे लगभग 11 महीनों के आयात का भुगतान किया जा सकता है। यह स्थिति वैश्विक आर्थिक अस्थिरता या बाहरी झटकों के समय देश के लिए मजबूत सुरक्षा कवच का काम करती है।

वैश्विक हालात से बढ़ सकती है महंगाई

हालांकि उन्होंने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और मुद्रा पर दबाव से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बना रह सकता है।

कर कटौती से उपभोक्ताओं को राहत

सीतारमण के अनुसार सरकार के संतुलित राजकोषीय प्रबंधन के कारण ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी जैसे कदम उठाए जा सके, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली।

उधारी घटाने से बढ़ेगी तरलता

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने उधारी कार्यक्रम को कम करते हुए 17.2 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 16.09 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में तरलता बनी रहेगी और निवेश तथा रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

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