दुर्ग | शहर के निजी स्कूलों में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश है। पालकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन अब विद्या के मंदिर को व्यवसाय का केंद्र बना चुके हैं। हर साल सिलेबस और लेखक बदलने से पिछले साल की किताबें किसी काम की नहीं रहतीं।
इसके कारण न तो छोटे भाई-बहन उन किताबों का उपयोग कर पाते हैं और न ही उन्हें किसी और को दिया जा सकता है।अभिभावकों के बड़े सवाल:क्यों हर साल प्रकाशक बदले जाते हैं जबकि विषय वही रहते हैं?
क्या शिक्षा विभाग का इन निजी संस्थानों पर कोई नियंत्रण नहीं है?आखिर क्यों प्रशासन इन स्कूलों को NCERT या SCERT की पुस्तकें चलाने के लिए बाध्य नहीं करता?पालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने इस पर जल्द कड़े कदम नहीं उठाए, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।