दक्षिण बस्तर में बड़ी सफलता: 43 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

रायपुर : तेलंगाना में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सली संगठन के अंतिम प्रमुख कमांडर माने जा रहे सोढ़ी केशा ने अपने कई साथियों के साथ हैदराबाद में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

जानकारी के अनुसार, सोढ़ी केशा लंबे समय से दक्षिण बस्तर क्षेत्र में सक्रिय नक्सली इकाई की कमान संभाल रहे थे। वह उस समूह के प्रमुख माने जाते थे जिसे संगठन की अंतिम मजबूत टुकड़ी माना जा रहा था। इससे पहले मुठभेड़ में हिड़मा के मारे जाने और बारसे देवा के आत्मसमर्पण के बाद संगठन की कमान सोढ़ी केशा के हाथों में आ गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, यह नक्सली दल लंबे समय से कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में सक्रिय था और वहीं से अपनी गतिविधियों का संचालन करता रहा। अब इस समूह के 40 से अधिक सदस्यों के एक साथ सरेंडर करने के बाद क्षेत्र में नक्सली ढांचे के लगभग समाप्त होने की स्थिति बताई जा रही है।

सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियार भी पुलिस को सौंपे। इनमें AK-47, SLR, INSAS राइफल, BGL लॉन्चर और रिवॉल्वर शामिल हैं, जिनका उपयोग सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों में किया जाता था।

सोढ़ी केशा को पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) का शीर्ष कमांडर माना जाता रहा है। उनके आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं।

इस आत्मसमर्पण में केवल सामान्य कैडर ही नहीं बल्कि डिविजनल और एरिया कमेटी स्तर के कई बड़े नेता भी शामिल हैं, जिससे संगठन की कमर टूटने की बात कही जा रही है और पूरे इलाके में नक्सल प्रभाव बेहद कमजोर होने का संकेत मिला है।

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