तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच विवाद गहराता जा रहा है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के कुछ प्रमुख बंदरगाहों पर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध जैसी स्थिति लागू कर दी है, जिससे समुद्री व्यापार गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि मौजूदा हालात में ईरान के लिए चीन को तेल निर्यात करना मुश्किल हो गया है।
इस बीच रूस ने स्थिति का फायदा उठाते हुए चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की पेशकश की है। माना जा रहा है कि बीजिंग अब वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर तेजी से रुख कर सकता है।
हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद ईरान के कुछ जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में सफल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं है।
इधर कूटनीतिक मोर्चे पर भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी। इसके बाद तेहरान में एक विस्फोट की घटना सामने आई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। अभी तक विस्फोट के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
अब दोनों देशों के बीच अगले दौर की बातचीत 16 अप्रैल को होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, क्षेत्रीय मध्यस्थता प्रयासों में विफलता के बाद अमेरिका अब भारत की भूमिका पर भी नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में लंबी बातचीत हुई, जिसमें मध्य-पूर्व में स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।