रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 मई से प्रस्तावित घर-घर जनगणना सर्वे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी और लू की स्थिति के बीच शिक्षकों की इस कार्य में ड्यूटी लगाए जाने पर शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।
शिक्षक संघों का कहना है कि मई में तापमान बेहद अधिक रहने की संभावना है और ऐसे में फील्ड में घंटों पैदल चलकर डेटा एकत्र करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। उनका तर्क है कि जब सरकार स्वयं नागरिकों को गर्मी से बचाव की सलाह दे रही है, तब शिक्षकों को इसी मौसम में खुले में काम करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।
संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो जनगणना सर्वे का समय बदला जाए या फिर इसे करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, जिससे शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
इसके साथ ही शिक्षक संगठनों ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने मांग की है कि इस प्रकार की ड्यूटी के दौरान यदि किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या दुर्घटना होती है तो प्रभावित शिक्षकों के लिए कम से कम 1 करोड़ रुपये का बीमा कवर सुनिश्चित किया जाए।
वहीं, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसमें सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी सेवा शर्तों का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय समय पर इस कार्य को पूरा करना आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई संभव नहीं है।
गौरतलब है कि राज्य में 16 अप्रैल से स्वयं जनगणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद 1 मई से घर-घर जाकर फील्ड सर्वे का चरण शुरू किया जाएगा, जो जनगणना प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल एक तरफ सरकार इसे जरूरी प्रशासनिक कार्य बता रही है, तो दूसरी ओर शिक्षक संगठन इसे कठिन मौसम में मानव स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं। अब देखना होगा कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।