नई दिल्ली। देश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को लेकर एक अहम बदलाव सामने आया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में महिला श्रम भागीदारी दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 में जहां यह दर करीब 23 प्रतिशत थी, वहीं अब 2025 तक यह बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उनके अनुसार, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि देश में महिलाएं तेजी से आर्थिक गतिविधियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार हुआ है, जिससे उनकी हिस्सेदारी में लगातार सुधार देखने को मिला है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि महिला वर्कर पॉपुलेशन रेशियो भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, जबकि महिला बेरोजगारी दर में कमी आई है। इसका मतलब है कि अब पहले की तुलना में अधिक महिलाएं रोजगार हासिल कर रही हैं।
इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा के दायरे में भी बड़ा विस्तार हुआ है। मंत्री के अनुसार, पिछले एक दशक में सोशल सिक्योरिटी कवरेज में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे बड़ी संख्या में कामकाजी लोगों को सुरक्षा का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने श्रम सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि नए लेबर कोड्स लागू होने के बाद कामकाजी माहौल में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं। खासतौर पर गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी पहचान मिली है, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं को भी फायदा होगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि समान काम के लिए समान वेतन, वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा, मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल पर क्रेच जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं के लिए रोजगार को अधिक अनुकूल बना रही हैं। इन कदमों से महिलाओं को लंबे समय तक कार्यबल में बने रहने में मदद मिल रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।