मतगणना को लेकर सुरक्षा कड़ी, BJP-TMC ने बिछाया सियासी जाल

सख्त पहरे में 77 केंद्रों पर वोटों की गिनती, सुरक्षा चाक-चौबंद

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरण शांतिपूर्वक पूरे होने के बाद अब पूरा राज्य 4 मई की मतगणना पर टिका हुआ है। नतीजों से पहले चुनाव आयोग ने इस बार गिनती की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और तेज बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं, जिनमें सबसे बड़ा कदम मतगणना केंद्रों की संख्या घटाना रहा है।

आयोग के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भाजपा दोनों ही अंतिम नतीजों से पहले अपनी रणनीतियों को धार दे रहे हैं और “काउंटिंग मैनेजमेंट” पर खास ध्यान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही ईवीएम को लेकर शंका जता चुकी हैं और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस ने स्ट्रांग रूम से लेकर मतगणना टेबल तक निगरानी की बहुस्तरीय व्यवस्था पर जोर दिया है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को रोका जा सके।

दूसरी ओर भाजपा भी इस बार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। पार्टी नेतृत्व ने कोलकाता में 2 मई को एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें चुनाव प्रबंधन से जुड़े प्रमुख नेता शामिल होंगे। भाजपा का फोकस इस बात पर है कि उसके मतगणना एजेंट आखिरी राउंड तक केंद्रों पर मौजूद रहें और हर चरण की बारीकी से निगरानी करें।

इधर वाममोर्चा और कांग्रेस ने भी अपने-अपने स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। दोनों दल मतगणना एजेंटों की नियुक्ति और प्रशिक्षण को लेकर सक्रिय हो गए हैं, ताकि गिनती के दिन कोई कमी न रह जाए।

मतगणना केंद्रों की संख्या में कटौती इस चुनाव की सबसे चर्चित बात बन गई है। पहले जहां 2021 में 108 केंद्र बनाए गए थे, वहीं इस बार संख्या घटाकर 77 कर दी गई है। यह फैसला एक ही बार में नहीं लिया गया, बल्कि चरणबद्ध तरीके से केंद्रों की संख्या कम की गई।

आयोग का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य सिर्फ समय की बचत नहीं, बल्कि सुरक्षा और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना भी है। पिछले चुनावों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। स्ट्रांग रूम से लेकर मतगणना केंद्रों तक सुरक्षा बलों की तैनाती बरकरार है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

कुल मिलाकर, मतदान के बाद भले ही शांति रही हो, लेकिन मतगणना से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। अब सभी की निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *