नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के सामने बातचीत का नया प्रस्ताव रखा, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि तेहरान की शर्तें ऐसी हैं, जिन पर सहमति बन पाना मुश्किल है।
करीब डेढ़ महीने तक चले संघर्ष के बाद भले ही सैन्य मोर्चे पर स्थिति कुछ शांत दिख रही हो, लेकिन जमीनी हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान अपने क्षतिग्रस्त सैन्य ढांचे को फिर से खड़ा करने में जुटा है और मिसाइल व ड्रोन क्षमताओं को तेजी से बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
इसी बीच, अमेरिका ने अपने सहयोगी इजरायल को बड़े पैमाने पर सैन्य उपकरण और हथियार उपलब्ध कराए हैं, जिससे क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन और अधिक जटिल हो गया है। बताया जा रहा है कि यह आपूर्ति हालिया घटनाक्रमों के मद्देनजर की गई है।
कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान का नया प्रस्ताव मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही को सामान्य करने पर केंद्रित है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। हालांकि, अमेरिका की ओर से इस पहल को फिलहाल सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।
इस बीच, तेहरान में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है। संदिग्ध गतिविधियों और ड्रोन की मौजूदगी की आशंका के चलते एयर डिफेंस सिस्टम को कुछ समय के लिए सक्रिय किया गया, जिससे राजधानी में हलचल देखी गई। हालांकि, किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने संभावित रणनीतिक विकल्पों पर भी विचार किया है, जिनमें सीमित कार्रवाई से लेकर उन्नत हथियारों के इस्तेमाल तक की योजनाएं शामिल हैं।
कुल मिलाकर, एक ओर जहां बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य तैयारियों और अविश्वास के चलते क्षेत्र में तनाव कम होने के आसार फिलहाल कम नजर आ रहे हैं।