ईरान-तनाव का असर एविएशन सेक्टर पर, एयर इंडिया ने 100 उड़ानें कीं रद्द

नई दिल्ली : नई दिल्ली में वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब विमानन उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों पर पड़ा है।

हवाई ईंधन की कीमतों में भारी उछाल
तेल आपूर्ति में बाधा के चलते जेट फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ATF की बढ़ती दरों ने एयरलाइंस के परिचालन खर्च को कई गुना बढ़ा दिया है। पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रही विमानन कंपनियां अब और मुश्किल स्थिति में पहुंच गई हैं, जहां कई कंपनियों को अपने संचालन में कटौती करनी पड़ रही है।

एयर इंडिया ने घटाईं उड़ानें
बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने के लिए भारत की प्रमुख एयरलाइन ने बड़ा कदम उठाया है। एयरलाइन ने अपने दैनिक उड़ान संचालन में लगभग 100 फ्लाइट्स की कटौती की है। इसका असर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रूट्स पर देखने को मिलेगा, जिनमें यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे प्रमुख गंतव्य शामिल हैं। यात्रियों को आने वाले दिनों में शेड्यूल में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

एटीएफ कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वर्तमान में हवाई ईंधन की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई हैं। लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद ATF का दाम एक लाख रुपये प्रति किलोलीटर से ऊपर चला गया है। इस वजह से एयरलाइन इंडस्ट्री पर भारी वित्तीय दबाव बन गया है, और अनुमान है कि सेक्टर को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

अमेरिका में एयरलाइन बंद होने की स्थिति
इसी वैश्विक संकट का असर अमेरिका में भी देखने को मिला है, जहां एक लो-कॉस्ट एयरलाइन को लगातार बढ़ते ईंधन खर्च और आर्थिक दबाव के कारण अपना संचालन बंद करना पड़ा है। वर्षों से चल रही इस कंपनी के बंद होने से हजारों कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।

भू-राजनीतिक तनाव बना मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने और क्षेत्रीय राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। इससे न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि पूरी एविएशन इंडस्ट्री पर असर पड़ा है, जिससे उड़ानें महंगी और सीमित होती जा रही हैं।

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