कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही मौजूदा मंत्रिमंडल को भी तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया गया।
राजभवन की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 174(2)(बी) के तहत यह फैसला लिया गया है। आदेश लागू होते ही राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है।
हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया। 293 सीटों में से भाजपा को 207 सीटें मिलीं, जबकि लंबे समय से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत थी, जिसे भाजपा ने आसानी से पार कर लिया।
चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया था। खासतौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख को लेकर सियासी बहस तेज हो गई। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया और हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
सबसे चर्चित मुकाबला भवानीपुर सीट पर रहा, जहां भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। यह सीट लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है।
अब विधानसभा भंग होने के बाद राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। भाजपा खेमे में सरकार बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है।