भारत और बांग्लादेश के बीच समुद्री संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारतीय नौसेना का इंडियन ओशन शिप (आईओएस) सागर शुक्रवार को बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह पहुंचा। बंगाल की खाड़ी से सफल यात्रा पूरी करने के बाद जहाज का बांग्लादेश नौसेना ने औपचारिक स्वागत किया।
बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, यह दौरा आईओएस सागर 2026 बहुराष्ट्रीय तैनाती मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सहयोग, सुरक्षा समन्वय और पेशेवर साझेदारी को बढ़ावा देना है। जहाज के बांग्लादेशी समुद्री सीमा में प्रवेश करते ही बांग्लादेश नौसेना के युद्धपोत बीएनएस अली हैदर ने उसका स्वागत किया और चटगांव पोर्ट तक एस्कॉर्ट किया।
इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी बांग्लादेश नौसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे। इनमें चट्टोग्राम नेवल एरिया के कमांडर, बांग्लादेश नेवल फ्लीट के प्रतिनिधि और डॉकयार्ड प्रशासन के अधिकारियों के साथ रणनीतिक चर्चाएं शामिल हैं। इन बैठकों में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सहयोग और प्रशिक्षण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
चटगांव प्रवास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शुक्रवार शाम बांग्लादेश सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा, जबकि अगले दिन आईओएस सागर की ओर से विशेष डेक रिसेप्शन रखा जाएगा।
कार्यक्रम के तहत भारतीय नौसेना के अधिकारी चटगांव कॉमनवेल्थ वॉर सिमेट्री में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे। यह समारोह दोनों देशों के साझा इतिहास और बलिदानों की याद को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
इसके अलावा भारतीय प्रतिनिधिमंडल चटगांव पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ समुद्री लॉजिस्टिक्स, पोर्ट सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर चर्चा करेगा। दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच क्रॉस-डेक विजिट और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम भी रखे गए हैं।
भारतीय नौसेना का दल बांग्लादेश नेवल एकेडमी और बीएनएस आईएसएसए खान ट्रेनिंग कॉम्प्लेक्स का भी दौरा करेगा, जहां प्रशिक्षण प्रणालियों और क्षमता निर्माण से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की जाएगी।
भारतीय उच्चायोग ने कहा कि चटगांव में आईओएस सागर की मौजूदगी भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘महासागर’ पहल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह दौरा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए दोनों देशों की साझा सोच को मजबूत करता है।