नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि “मोदी जी अब ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री पद पर नहीं रहेंगे और आने वाले एक साल में उनकी विदाई तय है।” राहुल गांधी के इस बयान के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को आर्थिक मुद्दों पर घेरते हुए कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर सरकार पूरी तरह “एक्सपोज” हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अब सरकार की नीतियों से परेशान है और बदलाव चाहती है।
बीजेपी का पलटवार
राहुल गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह मजबूत और स्थिर है तथा विपक्ष के दावों का कोई असर नहीं पड़ने वाला। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष सरकार को अस्थिर करने के सपने देख रहा है, लेकिन जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है।
दलित राजनीति पर कांग्रेस का फोकस
इसी बीच दिल्ली में कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राजेंद्र पाल गौतम ने की। बैठक में राहुल गांधी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अगर 1980 और 1990 के दशक में कांग्रेस ने दलित समुदाय पर ज्यादा ध्यान दिया होता, तो आज क्षेत्रीय दल इतने मजबूत नहीं होते।
संगठन में बढ़ेगा दलित प्रतिनिधित्व
बैठक में कांग्रेस ने फैसला लिया कि पार्टी संगठन और कांग्रेस शासित राज्यों में अनुसूचित जाति समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। पार्टी ने दलित समुदाय को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया।
15 राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधि
इस रणनीतिक बैठक में दक्षिण भारत के 15 राज्यों से करीब 380 जिला अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य दलित समुदाय के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करना और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पार्टी को अधिक सक्रिय बनाना बताया गया।