40 की उम्र के बाद क्यों बढ़ जाता है घुटनों का दर्द? जानिए असली कारण

डेस्क। अगर आपकी उम्र 40 या 50 के आसपास है और घुटनों में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, तो इसे सिर्फ उम्र बढ़ने का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। कई मामलों में यह दर्द किसी गंभीर ऑर्थोपेडिक समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है, जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, घुटनों का दर्द तुरंत सर्जरी की ओर इशारा नहीं करता, बल्कि यह संकेत देता है कि जोड़ों को सही देखभाल, व्यायाम और समय पर इलाज की जरूरत है।

बढ़ती उम्र में घुटनों पर क्यों बढ़ता है दबाव?

इंडियन जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में प्रकाशित अध्ययनों के मुताबिक भारत में 40 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 28 प्रतिशत लोग घुटनों के दर्द से परेशान रहते हैं। इनमें से कई लोग लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करते हैं, जिससे जोड़ों में घिसाव बढ़ सकता है और बाद में इलाज कठिन हो जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि घुटने शरीर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला जोड़ है, जिस पर रोजाना लगातार दबाव पड़ता है। सही समय पर देखभाल न होने पर इसकी मजबूती धीरे-धीरे कम होने लगती है।

घुटनों के दर्द के प्रमुख कारण

आज के समय में घुटनों की समस्या केवल उम्र से जुड़ी नहीं रह गई है। इसके पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं:

  • मोटापा और शरीर पर बढ़ता वजन
  • लंबे समय तक बैठकर काम करना (डेस्क जॉब)
  • शारीरिक गतिविधि की कमी
  • लगातार ड्राइविंग या यात्रा
  • हाई हील्स का अधिक उपयोग
  • जिम में गलत तरीके से भारी व्यायाम
  • पुरानी चोटें या खेल से जुड़ी चोटें
  • थायरॉइड जैसी स्वास्थ्य समस्याएं

इसके अलावा, यूरिक एसिड बढ़ने से गाउट और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी घुटनों के दर्द का कारण बन सकती हैं।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए:

  • घुटनों का दर्द लंबे समय तक बना रहना
  • सुबह उठते ही जकड़न महसूस होना
  • घुटनों से चरमराने या क्लिक की आवाज आना
  • सूजन या गर्माहट महसूस होना
  • चलने-फिरने में दिक्कत
  • घुटने का बार-बार लॉक होना या अस्थिर महसूस होना

कब जरूरी हो सकता है इलाज या सर्जरी?

विशेषज्ञों के अनुसार सर्जरी का निर्णय अंतिम विकल्प होता है। आमतौर पर पहले दवाइयों, फिजियोथेरेपी और लाइफस्टाइल सुधार से इलाज किया जाता है।

अगर दर्द इतना बढ़ जाए कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तभी सर्जरी पर विचार किया जाता है। खासकर 50 वर्ष से कम उम्र के मरीजों में डॉक्टर जल्दबाजी में घुटना रिप्लेसमेंट से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि कृत्रिम जोड़ की उम्र सीमित होती है।

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