लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न संग्रहालयों के विकास, आधुनिकीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए कई करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ना है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार केवल आधारभूत विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में संरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से परियोजनाएं पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि निर्माण कार्यों में लापरवाही या घटिया सामग्री का उपयोग करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार द्वारा वाराणसी के लामही स्थित मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में आंतरिक सज्जा और संग्रहण कार्यों के लिए 2.60 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वहीं फिरोजाबाद के ग्लास संग्रहालय में संग्रहण कार्यों के लिए 4.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
देवरिया के पुराने कचहरी परिसर में शहीद स्वर्गीय रामचंद्र विद्यार्थी स्मारक स्थल के विकास, आंतरिक सज्जा और संग्रहण कार्यों के लिए 30 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। यह परियोजना क्षेत्र की ऐतिहासिक और राष्ट्रवादी विरासत को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राजधानी लखनऊ स्थित राज्य संग्रहालय में भी व्यापक विकास कार्य किए जा रहे हैं। यहां बाल गैलरी, शैक्षिक गतिविधियों, कार्यशालाओं और लैंडस्केप विकास के लिए करीब 1.98 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा संग्रहालय परिसर में कैफेटेरिया और नए पुस्तकालय के निर्माण के लिए 4.59 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति दी गई है।
सरकार ने झांसी के सरकारी संग्रहालय को सुदृढ़ करने के लिए 3 करोड़ रुपये तथा कुशीनगर स्थित सरकारी बौद्ध संग्रहालय के सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए 15 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इन परियोजनाओं से विशेष रूप से विरासत और बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
योगी सरकार की इस पहल को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।