सरकार का मास्टरस्ट्रोक! विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स पूरी तरह माफ

नई दिल्ली रुपये पर बढ़ते दबाव और विदेशी पूंजी के लगातार पलायन के बीच केंद्र सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने शुक्रवार को अध्यादेश जारी कर आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में किए गए निवेश पर लगने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा और देश में दीर्घकालिक विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। सरकारी प्रतिभूतियां लंबी अवधि के निवेश साधन मानी जाती हैं, इसलिए कर छूट का उद्देश्य स्थिर और टिकाऊ निवेश को प्रोत्साहित करना है।

गौरतलब है कि इससे पहले विदेशी निवेशकों को इक्विटी और डेट निवेश से होने वाले दीर्घकालिक लाभ पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स देना पड़ता था। जुलाई 2024 के बजट में इस कर की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत की गई थी।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये पर भी पड़ा है। महंगे कच्चे तेल, बढ़ते व्यापार घाटे और डॉलर की मजबूत मांग के चलते रुपया लगातार दबाव में रहा है।

रुपये को स्थिर बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को कई बार विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा है। डॉलर की बिक्री के कारण हाल के महीनों में देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा RBI ने कुछ दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड को ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ (Fully Accessible Route) के तहत शामिल कर विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के रास्ते आसान किए हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि LTCG टैक्स से छूट मिलने के बाद विदेशी निवेशकों का शुद्ध रिटर्न बढ़ेगा, जिससे भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में उनकी भागीदारी बढ़ सकती है। इससे विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत होगा, वित्तीय बाजारों में तरलता बढ़ेगी और सरकार को विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का यह कदम भारतीय वित्तीय बाजारों को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होने के साथ देश में दीर्घकालिक विदेशी निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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