तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच भले ही युद्धविराम की बात कही जा रही हो, लेकिन जमीनी हालात एक बार फिर तनाव की ओर इशारा कर रहे हैं। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अमेरिकी सेना ने कार्रवाई करते हुए ईरान के दो ड्रोन को मार गिराया है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे, जिसके चलते उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
मध्य पूर्व में फिर भड़की कूटनीतिक और सैन्य हलचल
इस घटना के बाद मध्य पूर्व में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी हालात को शांत कराने और मध्यस्थता प्रयासों के तहत तेहरान पहुंचे हैं। उनके इस दौरे को एक अहम कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, वे इस दौरे में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का संदेश भी ईरान नेतृत्व तक पहुंचा सकते हैं।
100 दिन से जारी संघर्ष, शांति प्रयासों पर सवाल
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को 100 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। अस्थायी युद्धविराम को स्थायी समझौते में बदलने की कोशिशें बार-बार असफल हो रही हैं।
इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
मिसाइल हमलों और आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ा तनाव
इसी बीच ईरान पर आरोप है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइल हमले किए, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। वहीं ईरान ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ड्रोन कार्रवाई को “उकसावे वाली” बताया है।
24 अरब डॉलर की संपत्ति पर विवाद
इस पूरे विवाद के बीच ईरान ने अमेरिका से अपनी लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति जारी करने की मांग की है। वहीं अमेरिका की ओर से संकेत मिले हैं कि यह राशि फिलहाल सहयोगी देशों के नुकसान की भरपाई में इस्तेमाल की जा सकती है।
बढ़ते तनाव के बीच अनिश्चित भविष्य
स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद समाधान की कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिख रही है। अब नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय दबाव इस तनाव को कम करने में कितना असर डाल पाते हैं।