चंडीगढ़। हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गिरफ्तारी की पुष्टि की है। हालांकि, एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें किस स्थान से गिरफ्तार किया गया। उन्हें मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
वर्तमान में पंकज अग्रवाल हरियाणा सरकार के आर्किटेक्चर विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं। सीबीआई के अनुसार, कथित घोटाले के दौरान वे शिक्षा विभाग और कृषि विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात थे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के बैंक खाते चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में निर्धारित नियमों के विपरीत खोले गए थे। बाद में इन खातों में तय सीमा से अधिक सरकारी धनराशि स्थानांतरित की गई।
सीबीआई का आरोप है कि इन खातों के माध्यम से फर्जी वित्तीय लेनदेन किए गए और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, जिससे राज्य सरकार को करीब 60.54 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच के दौरान पंकज अग्रवाल की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
एजेंसी अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, निजी कंपनियां और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।
इससे पहले 18 जून को सीबीआई ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आर.के. सिंह को भी गिरफ्तार किया था। उन पर पंचकूला नगर निगम से जुड़े सरकारी धन के गबन में संलिप्त होने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा से जुड़े बड़े वित्तीय घोटाले का हिस्सा है।
सीबीआई का कहना है कि जांच के दौरान आर.के. सिंह की भूमिका उस समय सामने आई, जब वे पंचकूला नगर निगम और कालका नगर परिषद में आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। एजेंसी ने दावा किया है कि गिरफ्तारी से पहले उन्होंने कथित मास्टरमाइंड के साथ हुई अपनी चैट भी डिलीट कर दी थी। फिलहाल आर.के. सिंह न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और घोटाले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल जारी है।