रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026 को मंजूरी दे दी गई। यह नीति राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सरकार के अनुसार छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, पैडी स्ट्रॉ, गोबर, पशुधन अपशिष्ट, नगरीय ठोस कचरा, प्रेसमड, गन्ना अवशेष तथा नेपियर जैसी ऊर्जा फसलों से प्रतिवर्ष करीब 1.65 लाख मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन की क्षमता मौजूद है। नई नीति लागू होने से राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिवर्ष लगभग 2.16 लाख टन पेट्रोल और डीजल के बराबर ईंधन की आपूर्ति सीबीजी के माध्यम से संभव होगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह नीति किसानों, गौपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर लेकर आएगी। कृषि अवशेषों और जैविक अपशिष्टों के उपयोग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
सीबीजी संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद के उपयोग से प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, भूमि की उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि यह नीति राज्य को हरित विकास और जलवायु अनुकूल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सीबीजी के उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और छत्तीसगढ़ नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य में प्रभावी योगदान दे सकेगा।
भारत सरकार की SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल के अनुरूप तैयार की गई इस नीति से राज्य में विकसित हो रहे सिटी गैस वितरण नेटवर्क और गैस अधोसंरचना का भी लाभ मिलेगा। इससे सीबीजी उत्पादन, वितरण और उपयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी।
छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) वर्ष 2024 से इस क्षेत्र में सक्रिय पहल कर रहा है। वर्तमान में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा सहित आठ स्थानों पर बीपीसीएल और गेल इंडिया लिमिटेड के निवेश से सीबीजी संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
राज्य में निजी क्षेत्र से भी इस उद्योग के प्रति उत्साह दिखाई दे रहा है और करीब 3,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नई नीति लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को और गति मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस नीति के छह प्रमुख आधार स्तंभ हैं— आधारभूत अधोसंरचना सहायता, फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, संयंत्र स्थापना एवं संचालन सहायता, जैव उर्वरक प्रबंधन एवं सहायक अधोसंरचना विकास, सीबीजी मांग सृजन एवं परिवहन क्षेत्र में एकीकरण तथा निवेश प्रोत्साहन एवं उद्योग विकास।
नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) को राज्य की नोडल एजेंसी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा, हरित उद्योग, जैविक कृषि और सतत विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।