नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर ठगी के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। UPI, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और कार्ड पेमेंट से जुड़े फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रस्तावित मुआवजा व्यवस्था चर्चा में है। इसके तहत पात्र ग्राहकों को साइबर फ्रॉड से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है।
इस पहल का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना और छोटे स्तर की ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए ग्राहकों को आर्थिक राहत प्रदान करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में सहायता दी जा सकेगी।
जानकारी के अनुसार, यदि किसी ग्राहक को ऑनलाइन धोखाधड़ी के कारण 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है, तो निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों के आधार पर उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है। हालांकि यह सुविधा स्वतः नहीं मिलेगी, बल्कि इसके लिए RBI द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और मानदंडों का पालन करना होगा।
प्रस्तावित नियमों के तहत पीड़ित को हुए नुकसान का 85 प्रतिशत तक या अधिकतम 25,000 रुपये तक मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति के साथ 20,000 रुपये की साइबर ठगी होती है और वह सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करता है, तो उसे निर्धारित नियमों के तहत राहत मिल सकती है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए समय पर शिकायत दर्ज कराना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रॉड का पता चलते ही पांच दिनों के भीतर बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था को सूचना देना जरूरी होगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की भी सलाह दी गई है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, OTP, PIN और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। संदिग्ध कॉल, मैसेज और स्क्रीन शेयरिंग ऐप से सावधान रहें। साथ ही बैंक खाते और UPI ऐप में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं जैसे बायोमेट्रिक लॉक और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग अवश्य करें।
यदि यह व्यवस्था निर्धारित समय पर लागू होती है, तो डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों ग्राहकों को साइबर ठगी के मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा और आर्थिक राहत मिल सकेगी।