“नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग का जागरूकता अभियान

दुर्ग : नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा श्री महावीर जैन पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के पांच न्यायाधीश  श्वेता पटेल, रवि कुमार कश्यप,  अंजली सिंह,  महिमा शर्मा एवं  आरती ध्रुव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्य  सुनाली पातरा सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में न्यायाधीशों का विद्यालय परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात न्यायाधीशों ने विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करते हुए उन्हें कानून, न्याय व्यवस्था एवं नागरिक कर्तव्यों के संबंध में सरल एवं सहज भाषा में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

शिविर के दौरान विद्यार्थियों को NDPS अधिनियम (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। न्यायाधीशों ने नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा एवं भविष्य को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी देते हुए बिना हेलमेट एवं बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन न चलाने की समझाइश दी गई। साथ ही मोबाइल एवं इंटरनेट के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक एवं ओटीपी साझा करने के खतरों के बारे में भी जागरूक किया गया तथा साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय बताए गए।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका न्यायाधीशों ने अत्यंत सरल, स्पष्ट एवं प्रेरणादायक ढंग से उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

अंत में विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार तथा कानून के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया। यह विधिक जागरूकता शिविर विद्यार्थियों में कानूनी समझ, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं अनुशासन की भावना विकसित करने की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं सफल सिद्ध हुआ।

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