भिलाई इस्पात संयंत्र में लोहा चोरी मामला: मुख्यमंत्री को सौंपे गए दस्तावेज, केंद्रीय एजेंसियों से जांच पर बनी सहमति

भिलाई नगर |  भिलाई इस्पात संयंत्र में वर्षों से जारी संगठित लोहा चोरी के कथित काले कारोबार के खिलाफ वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सौंपते हुए निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने पर सहमति जताई है।

विधायक सेन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे राष्ट्रीय महत्व के सार्वजनिक उपक्रम में कथित तौर पर कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से संगठित गिरोह लंबे समय से लोहा चोरी कर रहा है, जिससे देश की बहुमूल्य संपत्ति को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे केवल चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध करार दिया।

विधायक सेन का आरोप है कि इस अवैध कारोबार से अर्जित धन का उपयोग विभिन्न चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के खिलाफ भी किया गया। उन्होंने पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधायक की पहल की सराहना करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे राष्ट्रीय संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लोहा चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आवश्यक और कड़े कदम उठाए जाएंगे।

विधायक सेन ने बताया कि इस मुद्दे पर वे बीएसपी की विभिन्न श्रमिक एवं कर्मचारी यूनियनों से भी चर्चा कर चुके हैं। श्रमिक संगठनों ने भी संयंत्र की संपत्ति की सुरक्षा और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए इस अभियान का समर्थन किया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुहिम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि वर्षों से सक्रिय संगठित तंत्र के विरुद्ध है। इस संबंध में शिकायतें केंद्रीय इस्पात मंत्री, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, एंटी करप्शन ब्यूरो सहित अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसियों को भी सौंपी जा रही हैं।

विधायक रिकेश सेन ने कहा कि यदि समय रहते इस संगठित गिरोह पर कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान का सिलसिला जारी रहेगा। उनका उद्देश्य दोषियों को बेनकाब कर भिलाई इस्पात संयंत्र की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगाना है।

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