दुर्ग | बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्रीय जेल दुर्ग में आज नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना तथा स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता हिमांशु जैन, प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, जिला दुर्ग ने नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं पारिवारिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने नशे से मुक्ति के प्रभावी उपायों, काउंसलिंग की भूमिका, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के महत्व पर भी प्रकाश डाला।



इस अवसर पर बंदियों ने नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज में लौटकर जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
जेल प्रशासन ने बताया कि बंदियों के सर्वांगीण विकास और सफल पुनर्वास के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम, योग, ध्यान, कौशल विकास एवं परामर्श गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सकारात्मक सोच विकसित करना और बंदियों को अपराध एवं नशे से दूर रखते हुए समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापित करना है।
कार्यक्रम में जेल अधीक्षक मनीष सम्भाकर सहित अन्य जेल स्टाफ उपस्थित रहे।