वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है। साथ ही, अगले वर्ष राष्ट्रपति ट्रंप के संभावित भारत दौरे की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए अलग-अलग साक्षात्कारों में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत अमेरिका के सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं।
जल्द पूरा हो सकता है व्यापार समझौता
मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और इसे जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन अगले वर्ष राष्ट्रपति के भारत दौरे की दिशा में भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
वहीं, सर्जियो गोर ने कहा कि बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और अब दोनों पक्ष अंतिम मसौदे की भाषा पर सहमति बनाने में जुटे हैं। उनका विश्वास है कि आने वाले कुछ सप्ताह या महीनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
मोदी-ट्रंप की दोस्ती को बताया मजबूत आधार
दोनों अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों को भारत-अमेरिका साझेदारी का अहम आधार बताया।
रुबियो ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत विश्वास और व्यक्तिगत तालमेल कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती देता है। वहीं, गोर ने कहा कि मोदी और ट्रंप वर्षों से अच्छे मित्र हैं और यह संबंध भविष्य में भी दोनों देशों के सहयोग को गति देगा।
रक्षा, तकनीक और ऊर्जा में बढ़ेगा सहयोग
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार के अलावा रक्षा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, सप्लाई चेन, नई तकनीक और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका में भारतीय निवेश और तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने पिछले एक वर्ष में अमेरिका में 20 अरब डॉलर से अधिक के नए निवेश को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हिंद-प्रशांत और क्वाड पर रहेगा विशेष फोकस
रुबियो ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देश क्वाड के माध्यम से जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर स्वतंत्र, सुरक्षित और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और अधिक गहरा करने पर दोनों देशों का विशेष जोर रहेगा।