लॉस एंजिल्स। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में साउथ अफ्रीका का सफर राउंड ऑफ 32 में समाप्त हो गया। कनाडा के खिलाफ खेले गए मुकाबले में मिली हार के साथ टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। हालांकि, हार के बावजूद मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूज ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचकर इतिहास रचा है और उन्हें इस उपलब्धि पर गर्व है।
मैच के बाद ब्रूज ने कहा कि हार निश्चित रूप से निराशाजनक है, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने से पहले किसी ने भी साउथ अफ्रीका के नॉकआउट तक पहुंचने की उम्मीद नहीं की थी। ऐसे में टीम ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया और देश को गर्व करने का मौका दिया।
शानदार वापसी के दम पर बनाई थी नॉकआउट में जगह
साउथ अफ्रीका ने अपने अभियान की शुरुआत मेक्सिको के खिलाफ हार से की थी। इसके बाद टीम ने चेकिया के खिलाफ ड्रॉ खेला और दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। यह उपलब्धि देश के फुटबॉल इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
कनाडा से करीबी मुकाबले में मिली हार
राउंड ऑफ 32 में कनाडा के खिलाफ मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन अंतिम क्षणों में स्टीफन यूस्टाकियो के निर्णायक गोल ने साउथ अफ्रीका की उम्मीदों को समाप्त कर दिया। मैच के बाद ब्रूज ने स्वीकार किया कि उनकी टीम को शारीरिक क्षमता, ताकत और गति के मामले में अभी और सुधार की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और जज्बे पर उन्हें कोई शिकायत नहीं है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार मानसिकता के साथ खेला और यह अनुभव भविष्य में टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
सबसे उम्रदराज नॉकआउट कोच बने ब्रूज
74 वर्षीय ह्यूगो ब्रूज इस मुकाबले के साथ फीफा वर्ल्ड कप नॉकआउट चरण में टीम की अगुवाई करने वाले सबसे उम्रदराज कोच भी बन गए। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट उनके करियर की यादगार उपलब्धियों में शामिल रहेगा।
एसएएफए ने भी की टीम की सराहना
साउथ अफ्रीका फुटबॉल एसोसिएशन (SAFA) के अध्यक्ष डॉ. डैनी जॉर्डन ने भी टीम के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि भले ही अभियान हार के साथ समाप्त हुआ हो, लेकिन पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचकर टीम ने देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अनुभव भविष्य में साउथ अफ्रीकी फुटबॉल को और मजबूत बनाएगा।