नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाए गए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के बाद ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान चारों राज्यों की मतदाता सूची से कुल 22 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं। आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची को अद्यतन, त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से निर्धारित नियमों के तहत की गई है।
सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा में देखने को मिला, जहां 21 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए। संशोधित सूची के बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 3.25 करोड़ रह गई है। निर्वाचन विभाग के मुताबिक इस पुनरीक्षण से मतदाता आंकड़ों की सटीकता बढ़ी है और मतदाता सूची में लिंगानुपात में भी सुधार दर्ज किया गया है।
वहीं, पूर्वोत्तर के राज्यों में भी व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया। मणिपुर में 42 हजार से अधिक, मिजोरम में 30 हजार से ज्यादा और सिक्किम में 11 हजार से अधिक नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों में दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन करने के बाद ही नाम हटाने की कार्रवाई की गई।
निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए थे या जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे, उनके नाम सूची से हटाए गए हैं। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल पात्र मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल करना और चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाना है।
चार राज्यों में लाखों नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने दोहराया है कि पूरी कार्रवाई चुनावी नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप की गई है। आयोग का कहना है कि शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची ही निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।