17 साल बाद भी जिंदा है मदनवाड़ा की शहादत की याद, शहीद रजनीकांत सिंह को नम आंखों से श्रद्धांजलि

भिलाई, 12 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के इतिहास में 12 जुलाई 2009 का दिन आज भी एक ऐसी पीड़ा बनकर दर्ज है, जिसे समय भी कम नहीं कर सका। राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा नक्सली हमले में पुलिस के कई जांबाज अधिकारियों और जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उन्हीं वीर सपूतों में रिसाली-भिलाई के शहीद रजनीकांत सिंह भी शामिल थे।

उनकी 17वीं पुण्यतिथि पर रविवार को रिसाली स्थित शहीद रजनीकांत सिंह स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। प्रेम संगवारी बहुउद्देशीय सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

डीजीपी अरुण देव गौतम ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके साथ दुर्ग रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य, एसएसपी विजय अग्रवाल, एएसपी सुखनंदन राठौर, नेवई थाना प्रभारी अनिल साहू सहित अनेक पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब डीजीपी अरुण देव गौतम ने शहीद रजनीकांत सिंह की पत्नी पिंकी सिंह से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि पुलिस परिवार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है और किसी भी आवश्यकता पर हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

इस अवसर पर समिति के संयोजक विष्णु पाठक ने वर्ष 2009 की उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए बताया कि मदनवाड़ा की शहादत केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रेरणा है।

श्रद्धांजलि सभा में प्रेम संगवारी बहुउद्देशीय सेवा समिति के अध्यक्ष मुकेश पाण्डेय, महासचिव रंग बहादुर सिंह, समिति के पदाधिकारी, सदस्य, शहीद परिवार तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीद को नमन किया और उनके बलिदान को सदैव स्मरण रखने का संकल्प लिया।

मदनवाड़ा की शहादत आज भी याद दिलाती है कि देश की सुरक्षा के लिए वर्दी पहनने वाले जवान केवल अपना कर्तव्य नहीं निभाते, बल्कि अपने परिवारों के सपनों का त्याग कर राष्ट्र की रक्षा का संकल्प निभाते हैं। ऐसे वीर सपूतों का बलिदान हमेशा अमर रहेगा।

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