उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण और भाद्रपद (भादौ) मास के दौरान भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारियों और दर्शन व्यवस्था को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष पहली सवारी 3 अगस्त 2026 को निकलेगी, जबकि अंतिम राजसी (शाही) सवारी 7 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। श्रावण मास में चार और भादौ मास में दो सवारियां निकाली जाएंगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन के अनुसार दर्शन के दौरान फोटो और वीडियो बनाने से कतारों की गति प्रभावित होती है और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इसी कारण यह निर्णय लिया गया है।
श्रावण-भादौ मास के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं। पूरे सवारी मार्ग और मंदिर क्षेत्र में 15 स्थानों पर मेडिकल टीम, 24 घंटे एंबुलेंस सेवा, पेयजल, स्वच्छता, शौचालय और निर्बाध बिजली की व्यवस्था रहेगी। पुलिस और प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखेंगे।
मंदिर प्रशासन के अनुसार 30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन मंदिर के पट सुबह 3 बजे खुलेंगे। इस अवधि में भस्म आरती प्रतिदिन सुबह 3 बजे से 5 बजे तक होगी। वहीं, प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को देखते हुए मंदिर के पट सुबह 2:30 बजे खोले जाएंगे और भस्म आरती सुबह 2:30 बजे से 4:30 बजे तक संपन्न होगी। 8 सितंबर से मंदिर की समय-सारिणी पहले की तरह लागू हो जाएगी।
महाकाल की सवारियों की तिथियां
- पहली सवारी: 3 अगस्त 2026 (सोमवार)
- दूसरी सवारी: 10 अगस्त 2026
- तीसरी सवारी: 17 अगस्त 2026
- चौथी सवारी: 24 अगस्त 2026
- पांचवीं सवारी: 31 अगस्त 2026 (भादौ)
- राजसी (शाही) सवारी: 7 सितंबर 2026 (सोमवार)
श्रावण मास में महाकाल की सवारियां और विशेष पूजा-अर्चना में शामिल होने के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करने और सहयोग बनाए रखने की अपील की है।