‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी ताकत, वडोदरा में C-295 विमान निर्माण से रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

अहमदाबाद। गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) की अत्याधुनिक फैसिलिटी में C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने इस परियोजना की जानकारी साझा करते हुए इसे भारत के एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में मंत्री ने कहा कि भारत में इस तरह के आधुनिक सैन्य विमान बनते देखना गर्व की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत न केवल सैन्य, बल्कि स्वदेशी सिविल एयरक्राफ्ट निर्माण में भी नई पहचान बनाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ को मिली नई ताकत

मंत्री ने कहा कि देश लगातार अपनी एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत कर रहा है। अहमदाबाद के पास बन रहे धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, टाटा समूह की प्रस्तावित सेमीकंडक्टर फैसिलिटी और एयरबस के साथ रक्षा साझेदारी से इस परियोजना को और मजबूती मिलेगी। इससे मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) क्षेत्र को भी बड़ा लाभ होगा।

भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा C-295

TASL ने मई 2026 में वडोदरा की फाइनल असेंबली लाइन से पहला C-295 विमान तैयार किया था, जिसने 10 जून को अपनी पहली सफल टेस्ट फ्लाइट पूरी की। एयरबस डिफेंस के अनुसार यह परियोजना भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार निजी क्षेत्र में भारत में सैन्य परिवहन विमान का निर्माण किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भारत में निर्मित C-295 की पहली उड़ान का उल्लेख कर चुके हैं और इसे देश के एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया था।

56 विमानों का ऑर्डर, भारत सबसे बड़ा ग्राहक

भारत ने 56 C-295 विमान खरीदने का ऑर्डर दिया है, जिससे वह इस विमान का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है। इनमें से 40 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिनकी 85 प्रतिशत से अधिक स्ट्रक्चरल मैन्युफैक्चरिंग और फाइनल असेंबली देश में ही होगी।

इस परियोजना के तहत लगभग 13,000 छोटे-बड़े पुर्जों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके लिए 21 विशेष विनिर्माण प्रक्रियाओं को प्रमाणित किया गया है और 37 भारतीय सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों को सप्लाई चेन से जोड़ा गया है। इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक रक्षा उत्पादन हब बनने की दिशा में एक मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा।

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