नई दिल्ली। भारत ने डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (Qdenga) को मंजूरी दे दी है। सोमवार को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने टेकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया की इस वैक्सीन को बाजार में उपलब्ध कराने की अनुमति प्रदान कर दी।
यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए स्वीकृत की गई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे उन लोगों को भी लगाया जा सकता है जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ हो। अन्य कुछ पुरानी डेंगू वैक्सीन के विपरीत, ‘क्यूडेंगा’ लगवाने से पहले किसी प्रकार की जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
भारत की डेंगू रोकथाम रणनीति को मिलेगी मजबूती
टेकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स के अनुसार, यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं। देश के कई क्षेत्रों में डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप सक्रिय हैं, ऐसे में यह वैक्सीन डेंगू नियंत्रण अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगी।
43 देशों में मिल चुकी है मंजूरी
टेकेडा के इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स के प्रमुख महेंद्र नायक ने बताया कि वर्ष 2022 में लॉन्च होने के बाद ‘क्यूडेंगा’ को अब तक 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और दुनियाभर में इसकी 3.2 करोड़ (32 मिलियन) से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं।
28 हजार से अधिक लोगों पर हुआ परीक्षण
कंपनी ने बताया कि वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले वैश्विक स्तर पर 19 फेज-1, फेज-2 और फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल किए गए, जिनमें डेंगू प्रभावित और गैर-प्रभावित देशों के 28 हजार से अधिक लोगों को शामिल किया गया। इसके अलावा भारत में हुए फेज-3 DEN-302 क्लिनिकल ट्रायल के आंकड़ों का भी मूल्यांकन किया गया, जिसमें 4 से 60 वर्ष के लोगों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता की जांच की गई।
सात वर्षों तक प्रभावी सुरक्षा
कंपनी के अनुसार, सात वर्षों के फॉलो-अप डेटा से यह साबित हुआ है कि ‘क्यूडेंगा’ डेंगू संक्रमण तथा वायरस के चारों सीरोटाइप से होने वाले गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में प्रभावी है।
दो डोज में लगेगी वैक्सीन
यह वैक्सीन 0.5 एमएल के दो सबक्यूटेनियस इंजेक्शन के रूप में दी जाएगी। दोनों डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाएगा।
टेकेडा के साउथ-ईस्ट एशिया एवं इंडिया क्लस्टर के मेडिकल अफेयर्स प्रमुख गो चू बेंग ने कहा कि यह वैक्सीन पहले डेंगू संक्रमण हुआ हो या नहीं, दोनों परिस्थितियों में डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप से सुरक्षा देने के लिए विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी वेक्टर कंट्रोल, निगरानी, जनजागरूकता और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के साथ मिलकर भारत की डेंगू रोकथाम रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाएगी।