नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किए जाने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि वांगचुक द्वारा भेजे गए पत्र और मेडिकल रिपोर्ट को देखते हुए उनकी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता तथा उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध मेडिकल दस्तावेज बताते हैं कि वांगचुक की सेहत पर नियमित निगरानी जरूरी है। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने का प्रस्ताव रखा गया है।
इधर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीजेपी के विरोध मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि फिलहाल उनकी सेहत को तत्काल कोई गंभीर खतरा नहीं है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें अभी नस (IV) के जरिए दवा देने की आवश्यकता नहीं है और सरकारी अस्पताल में भी उन्हें केवल मुंह से ली जाने वाली दवाएं दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धरना स्थल पर रहते हुए भी वांगचुक की मेडिकल निगरानी लगातार की जा रही थी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट तथा विशेषज्ञों की राय का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने कहा कि वांगचुक के यूरिक एसिड और ब्लड यूरिया के बढ़े हुए स्तर को लेकर डॉक्टरों से विस्तृत जानकारी आवश्यक है।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि किसी भी मरीज की स्थिति का आकलन केवल लैब रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन के आधार पर किया जाता है। बिना प्रत्यक्ष चिकित्सकीय जांच के दी गई राय पूरी तरह सटीक नहीं मानी जा सकती।
सरकारी डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट में व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) सामान्य से कम हैं, जो कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली का संकेत हो सकता है। इसके अलावा उनका हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स का स्तर भी सामान्य सीमा से नीचे है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति के लिए हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से अधिक होना चाहिए, जबकि वांगचुक का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया है।
एम्स के निदेशक ने अदालत को बताया कि वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर कम है, जिसकी भरपाई फिलहाल दवाओं से की जा रही है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ है, इसलिए उनसे मिलने आने वाले लोगों के लिए गाउन, कैप और मास्क जैसे सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए गए हैं।
फिलहाल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसका मुख्य उद्देश्य सोनम वांगचुक को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी सुनिश्चित करना है। मामले की अगली सुनवाई में डॉक्टरों की राय और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।