नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि भारत आज एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात, अंतरिक्ष तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया।
कारगिल के वीरों को किया नमन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस देश के लिए गर्व का प्रतीक है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों और दुश्मन की चुनौतियों के बावजूद अद्वितीय वीरता का परिचय दिया था। उन्होंने कहा कि देश हमेशा अपने वीर जवानों के साहस और बलिदान का ऋणी रहेगा।
रक्षा क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ताकत
पीएम मोदी ने कहा कि भारत रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में देख रही है और देश अपनी सैन्य क्षमताओं को निरंतर मजबूत कर रहा है।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल समझौते का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में इंडोनेशिया यात्रा के दौरान ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते हुए, जो भारत की रक्षा कूटनीति और तकनीकी क्षमता को नई मजबूती देंगे।
डीआरडीओ की उपलब्धियों की सराहना
उन्होंने कहा कि इसी महीने डीआरडीओ ने लंबी दूरी तक मार करने वाले पिनाका रॉकेट का सफल परीक्षण किया। इसके साथ ही कुशा मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया गया, जो भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कड़ी मेहनत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
विक्रम-1 ने रचा नया इतिहास
प्रधानमंत्री ने कहा कि विक्रम-1 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण है। यह निजी क्षेत्र द्वारा विकसित भारत का पहला रॉकेट है, जिसने देश के युवा वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों की प्रतिभा को दुनिया के सामने साबित किया है।
विज्ञान और नवाचार में बढ़ रही भारत की पहचान
पीएम मोदी ने कहा कि विक्रम-1 की सफलता से लेकर अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय छात्रों के शानदार प्रदर्शन तक, भारत विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में लगातार नई पहचान बना रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत तकनीक, रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा।