डेस्क। अगर आपकी आंखें पीली पड़ने लगी हैं या पेशाब (यूरिन) का रंग सामान्य से अधिक गहरा हो गया है, तो इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। ये लक्षण हेपेटाइटिस-ए जैसी लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते बीमारी की पहचान और डॉक्टर से उचित सलाह लेने पर इसका इलाज आसान हो जाता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
कैसे फैलता है हेपेटाइटिस-ए?
हेपेटाइटिस-ए वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के मल से फैलता है। दूषित भोजन या पानी का सेवन, खराब स्वच्छता, गंदे पानी का उपयोग और साफ-सफाई की कमी संक्रमण के प्रमुख कारण हैं। संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क या कुछ प्रकार के यौन संपर्क से भी यह वायरस फैल सकता है। इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित व्यवहार अपनाना बेहद जरूरी है।
किन लोगों को रहता है ज्यादा खतरा?
इस बीमारी का खतरा उन लोगों में अधिक होता है जिन्हें हेपेटाइटिस-ए का टीका नहीं लगा है या जो ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां स्वच्छ पानी और साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने वाले, दूषित भोजन या पानी का सेवन करने वाले और संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों में भी इसका जोखिम अधिक रहता है।
हेपेटाइटिस-ए के प्रमुख लक्षण
हेपेटाइटिस-ए के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, लगातार थकान, गहरे रंग का पेशाब और आंखों व त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) शामिल हैं। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बच्चों और वयस्कों में अलग हो सकते हैं लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, 6 वर्ष से कम उम्र के कई बच्चों में हेपेटाइटिस-ए बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकता है। वहीं वयस्कों में पीलिया, बुखार, थकान और पाचन संबंधी समस्याएं अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जिससे बीमारी की पहचान जल्दी हो जाती है।
इलाज और बचाव
हेपेटाइटिस-ए के लिए फिलहाल कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। मरीज को पर्याप्त आराम, संतुलित आहार, अधिक तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं दी जाती हैं। अधिकांश मरीज कुछ सप्ताह या महीनों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
संक्रमण से बचाव के लिए हमेशा साफ और सुरक्षित पानी पिएं, भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं, दूषित भोजन और पानी से बचें तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें। जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह पर हेपेटाइटिस-ए वैक्सीन लगवाना भी प्रभावी बचाव का तरीका है।
लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
यदि लगातार बुखार, भूख न लगना, गहरे रंग का पेशाब, आंखों या त्वचा का पीला पड़ना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से बीमारी का सही इलाज संभव है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।