नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को और मजबूती देते हुए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में निर्मित माहे श्रेणी के सातवें उथले जल में चलने वाले पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) ‘मछलीपटनम’ का मंगलवार को औपचारिक शुभारंभ किया गया। सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद की उपस्थिति में श्रीमती गुलरुख आनंद ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ युद्धपोत का शुभारंभ किया। समारोह में भारतीय नौसेना, सीएसएल के वरिष्ठ अधिकारियों और कई विशिष्ट अतिथियों ने हिस्सा लिया।
युद्धपोत का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपटनम के नाम पर रखा गया है, जो भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व का प्रतीक माना जाता है। यह नाम भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह युद्धपोत समुद्र के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान (एएसडब्ल्यू), निम्न तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (एलआईएमओ) तथा समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने जैसे महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
‘मछलीपटनम’ का शुभारंभ एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी परियोजना की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस परियोजना में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान और भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा, तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। इसके शामिल होने से नौसेना की परिचालन तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी और देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और अधिक प्रभावी होगी।