वाशिंगटन: ईरान की विवादित एयरलाइन और कथित आतंकी नेटवर्क को समर्थन देने के आरोप में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए भारत की एक कंपनी समेत छह संस्थाओं और व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग (ट्रेजरी) ने आरोप लगाया है कि इन संस्थाओं ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को वित्तीय और लॉजिस्टिक मदद पहुंचाने में भूमिका निभाई।
अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में भारत की ‘स्कीज ट्रैवल्स एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ का नाम भी शामिल है। यह कंपनी श्रीनगर और नई दिल्ली से संचालित होती है। अमेरिका का दावा है कि यह कंपनी साल 2020 से ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइन ‘महान एयर’ के जनरल सेल्स एजेंट के तौर पर काम कर रही थी और उसके व्यावसायिक संचालन में मदद कर रही थी।
IRGC और महान एयर को मदद का आरोप
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो भी संस्था या व्यक्ति IRGC या महान एयर को वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक सहायता या व्यावसायिक सहयोग देता है, वह आतंकवादी नेटवर्क को मजबूत करने में मदद करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ऐसी गतिविधियों में शामिल संस्थाओं की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा।
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि महान एयर लंबे समय से ईरान की कुद्स फोर्स और IRGC से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करती रही है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एयरलाइन ने कथित तौर पर सैन्य कर्मियों की आवाजाही, प्रशिक्षण गतिविधियों और हथियारों व ड्रोन की सप्लाई में भूमिका निभाई।
चीन और रूस की कंपनियां भी निशाने पर
अमेरिका की इस कार्रवाई में चीन और रूस की कुछ कंपनियों को भी शामिल किया गया है। प्रतिबंधित संस्थाओं में चीन की शंघाई विंग्स इंटरनेशनल लॉजिस्टिक कंपनी, शंघाई एलीट इंटरनेशनल ट्रैवल कंपनी, रूस की कार्गो प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
इसके अलावा चीन के नागरिक और शंघाई विंग्स के प्रबंध निदेशक तांग ज़न तथा ईरान के डाडेनेगर स्टार्टअप स्टूडियो पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिका का आरोप है कि इस स्टूडियो ने अमेरिकी और इजरायली सैन्य उपकरणों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
संपत्तियां होंगी फ्रीज, लेनदेन पर रोक
अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद इन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज कर दी जाएंगी। साथ ही अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को इनके साथ किसी भी तरह का व्यापारिक लेनदेन करने से रोक दिया गया है।
अमेरिका की इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों में हलचल बढ़ने की संभावना है, खासकर भारत, ईरान और अमेरिका के बीच कारोबारी संबंधों को लेकर।