नई दिल्ली। सावन का पहला सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शिवलिंग का जलाभिषेक करने तथा पूजा-अर्चना करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हालांकि, पूजा के दौरान कुछ ऐसी गलतियां हैं, जिनसे बचना आवश्यक माना गया है।
शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और कुमकुम न चढ़ाएं
धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान शिव को हल्दी, सिंदूर और कुमकुम अर्पित नहीं किया जाता। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।
बेलपत्र अर्पित करते समय रखें सावधानी
भगवान शिव को चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा हुआ होना चाहिए। सूखे, फटे या कीड़े लगे बेलपत्र अर्पित करने से बचें। परंपरा के अनुसार बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखकर चढ़ाई जाती है।
तुलसी और केतकी का फूल न चढ़ाएं
शिव पूजा में तुलसी के पत्ते और केतकी (केवड़ा) का फूल अर्पित करना वर्जित माना गया है। इसलिए पूजा के दौरान इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
जलाभिषेक श्रद्धा और धैर्य से करें
जलाभिषेक करते समय जल्दबाजी न करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए शांत मन और श्रद्धा के साथ जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और आस्था के साथ करनी चाहिए।
दूध से अभिषेक के बाद जल अवश्य चढ़ाएं
यदि शिवलिंग का अभिषेक दूध से किया जाए तो उसके बाद साफ जल भी अवश्य अर्पित करें। साथ ही अभिषेक में इस्तेमाल किया गया जल या दूध इधर-उधर न फैलाएं और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
व्रत में रखें सात्विकता
सावन सोमवार के व्रत में सात्विक जीवनशैली का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन क्रोध, झूठ, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि अच्छे आचरण और संयम से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
मंदिर में करें नियमों का पालन
यदि मंदिर में अधिक भीड़ हो तो धक्का-मुक्की करने या दूसरों की पूजा में बाधा डालने से बचें। अपनी बारी आने पर शांतिपूर्वक दर्शन करें। यदि किसी कारण मंदिर जाना संभव न हो तो घर पर भगवान शिव का ध्यान, महामृत्युंजय मंत्र, “ॐ नमः शिवाय” का जाप और शिव चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।
नोट: ये जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग परंपराओं और संप्रदायों में पूजा-विधि में भिन्नता हो सकती है।