वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी विवाद गहरा गया है। देश के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय की अनदेखी कर नए आयात शुल्क लागू किए हैं। राज्यों का कहना है कि यह फैसला अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर गैरकानूनी आर्थिक बोझ डालने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू हुआ नया टैरिफ
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि विदेशी वस्तुओं पर अधिक आयात शुल्क लगाने से अमेरिकी उद्योग और घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले सरकार ने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कई देशों से आने वाले आयात पर टैरिफ लगाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यवस्था पर रोक लगाते हुए आयातकों से वसूले गए शुल्क को लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर दी।
भारत समेत करीब 60 देशों पर असर
नई नीति के तहत भारत, यूरोपीय संघ सहित लगभग 60 देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक का नया आयात शुल्क लगाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इसका प्रभाव अमेरिका में होने वाले लगभग 99 प्रतिशत आयात पर पड़ सकता है।
25 राज्यों ने दी कानूनी चुनौती
नए टैरिफ के विरोध में 25 राज्यों ने इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का कहना है कि राष्ट्रपति को कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के बिना व्यापक स्तर पर नए आयात शुल्क लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद आम परिवारों और व्यापारिक संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की कोशिश कर रही है।
व्हाइट हाउस ने किया फैसले का बचाव
विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने नई टैरिफ नीति को पूरी तरह कानूनी और आवश्यक बताया है। प्रशासन का कहना है कि कई देश बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के व्यापार को रोकने में विफल रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी उद्योग, व्यापार और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह कदम उठाया गया है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानूनी विवाद लंबा खिंचता है तो अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। भारत समेत कई देशों के निर्यातकों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।