नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की समन्वित कार्रवाई से WhatsApp अकाउंट हैक करने वाले एक बड़े मैलवेयर अभियान को रोकने में सफलता मिली है। इस अभियान के तहत अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को साइबर हमले से सुरक्षित बचाया गया है।
गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को फर्जी दस्तावेजों के नाम पर मैलवेयर वाली फाइलें भेजकर उनके WhatsApp अकाउंट पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी। इस खतरे से निपटने के लिए I4C ने कई स्तरों पर कार्रवाई की। सहयोग पोर्टल के माध्यम से कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक करने सहित अन्य तकनीकी कदम उठाए गए।
WhatsApp अकाउंट टेकओवर की शिकायतों में बढ़ोतरी
गृह मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर हाल के दिनों में WhatsApp अकाउंट टेकओवर से संबंधित शिकायतों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। साइबर अपराधी ऐसे मैलवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें बैंक स्टेटमेंट, वित्तीय दस्तावेज या सरकारी एवं नियामक संस्थाओं के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में पेश किया जाता है।
मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में इस तरह के मामले सामने आए हैं। I4C ने इससे पहले 22 जून को भी एडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसे साइबर हमलों से सावधान रहने की अपील की थी।
‘RBI.zip’ और ‘MCA.zip’ जैसी फाइलों से रहें सावधान
साइबर अपराधी WhatsApp, SMS या ई-मेल के जरिए ‘Statement of Account.zip’, ‘RBI.zip’ और ‘MCA.zip’ जैसे नामों वाली संपीड़ित ZIP फाइल भेज रहे हैं। कई बार इन फाइलों के नाम के साथ तारीख भी जोड़ दी जाती है, जिससे वे अधिक विश्वसनीय दिखाई दें।
इन संदेशों को इस तरह तैयार किया जाता है कि प्राप्तकर्ता को लगे कि यह बैंक खाते का विवरण, वित्तीय दस्तावेज या किसी सरकारी नियामक संस्था की जरूरी सूचना है। इसी भरोसे में लोग फाइल डाउनलोड कर लेते हैं।
फाइल खोलते ही सिस्टम में इंस्टॉल हो जाता है मैलवेयर
गृह मंत्रालय के अनुसार, जब कोई व्यक्ति Windows कंप्यूटर या लैपटॉप पर ऐसी ZIP फाइल को एक्सट्रैक्ट कर खोलता है, तो उसके सिस्टम में ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद साइबर अपराधी डिवाइस को संक्रमित कर पीड़ित के सक्रिय WhatsApp Web सेशन को हाईजैक कर लेते हैं।
अकाउंट पर कब्जा करने के बाद अपराधी उसी WhatsApp अकाउंट के जरिए पीड़ित के संपर्कों और ग्रुप्स में संक्रमित फाइल भेजना शुरू कर देते हैं। कई मामलों में संदेश के साथ यह भी कहा जाता है कि फाइल को कंपनी के फाइनेंस मैनेजर को वेरिफिकेशन के लिए भेजकर कंप्यूटर पर खोला जाए।
इस तरह संक्रमण की यह श्रृंखला तेजी से फैल सकती है और आगे चलकर कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुंचकर बड़े साइबर सुरक्षा खतरे में बदल सकती है।
आयकर विभाग के नाम पर भी भेजे जा रहे फर्जी ई-मेल
मंत्रालय ने यह भी बताया कि साइबर अपराधी लोगों को भ्रमित करने के लिए आयकर विभाग सहित सरकारी संस्थाओं के नाम पर फर्जी ई-मेल भेज रहे हैं। ऐसे संदेशों में आधिकारिक दस्तावेज होने का दावा करते हुए संदिग्ध फाइल खोलने के लिए कहा जाता है।
सरकार की नागरिकों से अपील
गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान या संदिग्ध ZIP फाइल को डाउनलोड या ओपन न करें। यदि बैंक, RBI, MCA, आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम से कोई संदिग्ध संदेश या ई-मेल प्राप्त होता है, तो उसकी सत्यता की जांच संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से जरूर करें।
किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज करें।
सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने और बिना सत्यापन किसी भी संदिग्ध लिंक, अटैचमेंट या ZIP फाइल को नहीं खोलने की अपील की है।