मुंबई। अगर आप बैंक से लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं या पहले से किसी कर्ज की EMI चुका रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थाओं के लिए लोन की ब्याज दर तय करने को लेकर एक नए और पारदर्शी फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य कर्ज की ब्याज दरों में पारदर्शिता और एकरूपता लाना है, ताकि ग्राहकों को स्पष्ट रूप से पता चल सके कि उनके लोन पर ब्याज किस आधार पर तय किया गया है।
बोर्ड से मंजूर करानी होगी ब्याज दर नीति
RBI के प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, बैंकों और रेगुलेटेड वित्तीय संस्थाओं को ब्याज दर तय करने के लिए अपने बोर्ड से एक स्पष्ट और विस्तृत नीति मंजूर करानी होगी। इस नीति में बताया जाएगा कि लोन की ब्याज दर किस तरह तय होगी, कौन-सा बेंचमार्क इस्तेमाल किया जाएगा और दर निर्धारित करने का अधिकार किस स्तर पर होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, कोई भी लेंडर लागू बेंचमार्क से कम दर पर लोन नहीं दे सकेगा। इसके अलावा, बैंकों को ब्याज दर संबंधी अपनी नीति की कम से कम साल में एक बार समीक्षा करनी होगी।
फ्लोटिंग रेट लोन को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने का प्रस्ताव
नए फ्रेमवर्क में कमर्शियल बैंकों के लिए रिटेल और MSME ग्राहकों को दिए जाने वाले सभी फ्लोटिंग रेट लोन को किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना प्रस्तावित किया गया है। बाहरी बेंचमार्क किसी एक बैंक के नियंत्रण में नहीं होते। ऐसे में RBI की पॉलिसी रेट, जैसे रेपो रेट में बदलाव होने पर उसका असर लोन की ब्याज दर पर अपेक्षाकृत सीधे तरीके से पड़ सकेगा।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर को सामान्य तौर पर तीन महीने से अधिक के अंतराल पर रीसेट नहीं किया जा सकेगा। ब्याज की गणना रोजाना घटते हुए बकाया बैलेंस के आधार पर करने का भी प्रस्ताव है।
NBFC और कुछ अन्य संस्थाओं को राहत
प्रस्तावित नियमों में कमर्शियल बैंकों के लिए बाहरी बेंचमार्क से जुड़ाव को लेकर सख्ती की गई है, जबकि NBFCs, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और को-ऑपरेटिव बैंकों को इस मामले में कुछ छूट दी गई है। इन संस्थाओं के लिए बाहरी बेंचमार्क अपनाना अनिवार्य नहीं होगा और वे अपनी व्यवस्था के अनुसार फ्लोटिंग रेट लोन देने का विकल्प रख सकेंगी।
छोटे कर्जदारों और किसानों के लिए भी प्रावधान
RBI के प्रस्तावित फ्रेमवर्क में छोटे कर्जदारों को भी राहत देने का प्रावधान है। 50,000 रुपये तक के पर्सनल या माइक्रोफाइनेंस लोन के लिए वार्षिक प्रतिशत दर (APR) की स्पष्ट सीमा तय करने का निर्देश प्रस्तावित है। APR में ब्याज के साथ अन्य शुल्क भी शामिल होंगे।
वहीं, छोटे और सीमांत किसानों के शॉर्ट-टर्म कृषि ऋण में यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है कि कुल ब्याज और फीस किसी भी स्थिति में मूल राशि से अधिक न हो।
1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकता है नया सिस्टम
RBI ने इस ड्राफ्ट पर संबंधित पक्षों से 11 सितंबर 2026 तक सुझाव और राय मांगी है। सुझावों और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो नया सिस्टम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने का प्रस्ताव है।
यह बदलाव लागू होने पर लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज दर तय होने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है और उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि उनके कर्ज की ब्याज दर किन आधारों पर निर्धारित की जा रही है।