नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका समाधान करने के लिए भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, उसे साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही उन्हें जनता की चिंताओं, आकांक्षाओं और सुझावों को भी समझना चाहिए।
जनसंचार को बनाएं नागरिक केंद्रित
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रभावी जनसंचार केवल जानकारी पहुंचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। संचार व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे सरकार और नागरिकों के बीच सार्थक दोतरफा संवाद कायम हो सके।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों की बात सुनना और उनकी समस्याओं को समझना भी उनकी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है। उन्होंने जनसंचार को अधिक प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दिया।
गलत सूचनाओं से निपटने की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति मुर्मू ने तेजी से जटिल होते सूचना माहौल में तथ्यों और भ्रामक सूचनाओं के बीच अंतर करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि संकट के समय अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, ऐसे में नागरिकों को सही और प्रमाणिक जानकारी समय पर उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। संचार में सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
तकनीक का जिम्मेदारी से करें इस्तेमाल
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से नवीनतम तकनीकी साधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार के साथ नैतिक मूल्यों, मानवीय समझ और जवाबदेही को बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 की ओर बढ़ते भारत में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ संवाद करने का आग्रह किया।
आईएसएस प्रशिक्षु अधिकारियों से भी मिलीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी मुलाकात की। उन्हें संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में तथ्यों पर आधारित नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
उन्होंने कहा कि हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। इसलिए आंकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ और उपयोगी बनाया जाना चाहिए।
विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव होते हैं। प्रभावी सार्वजनिक नीतियां काफी हद तक सटीक, समय पर और भरोसेमंद आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़े तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये आंकड़े देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले नीतिगत फैसलों का आधार बनते हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि डिजिटल तकनीक, मशीन लर्निंग और आंकड़े जुटाने एवं उनके विश्लेषण के नए तरीकों के कारण देश की सांख्यिकी व्यवस्था बदलाव के दौर से गुजर रही है। हालांकि, इन तकनीकों के साथ सांख्यिकीय निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, गोपनीयता और पेशेवर उत्कृष्टता बनाए रखना भी जरूरी है।
प्रभावी संवाद और विश्वसनीय जानकारी लोकतंत्र के आधार
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा का साझा उद्देश्य शासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि प्रभावी संवाद और विश्वसनीय जानकारी एक जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।
उन्होंने अधिकारियों से अपने फैसलों में विवेकपूर्ण, व्यवहार में संवेदनशील और कार्यों में ईमानदार रहने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों का ज्ञान और कौशल महत्वपूर्ण है, लेकिन नागरिकों के प्रति उनका चरित्र, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता ही उनके योगदान को वास्तविक रूप से परिभाषित करेगी।