कोलकाता। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत वैश्विक जहाज निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देशों में घटती क्षमता भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। भारत अपनी विशाल कार्यबल, मजबूत इस्पात उद्योग और आधुनिक तकनीक के दम पर इस अवसर का फायदा उठा सकता है।
राजनाथ सिंह ने यह बात गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और यंत्र इंडिया लिमिटेड के पांच प्रोजेक्ट्स के वर्चुअल शिलान्यास के दौरान कही। इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 3,500 करोड़ रुपये है। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।
युद्धपोत और व्यावसायिक जहाजों की बढ़ रही मांग
रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में युद्धपोतों, तेल टैंकरों और व्यावसायिक जहाजों की मांग बढ़ रही है। दूसरी ओर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देशों में पिछले कुछ दशकों के दौरान शिपबिल्डिंग क्षमता में कमी आई है।
उन्होंने इसके पीछे बढ़ती श्रम लागत और पुराने शिपयार्ड के आधुनिकीकरण में कमी को प्रमुख कारण बताया। राजनाथ सिंह के मुताबिक, यही स्थिति भारत के लिए वैश्विक शिपबिल्डिंग बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर पैदा कर रही है।
डिजाइन, निर्माण और MRO पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को जहाज निर्माण के साथ-साथ डिजाइन और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।
भारत के पास इंजीनियरिंग और आईटी क्षेत्र में बड़ी प्रतिभा है। इसके अलावा देश की मजबूत स्टील इंडस्ट्री और विशाल कार्यबल जहाज निर्माण उद्योग के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षमताओं के सहारे भारत भविष्य में विश्वस्तरीय शिप डिजाइन हब भी बन सकता है।
रायचक में बनेगा बड़ा शिपबिल्डिंग हब
शिलान्यास किए गए पांच ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स में GRSE के तीन और यंत्र इंडिया के दो प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। GRSE ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता के साथ दो छोटे शिपयार्ड और रायचक में 32 एकड़ नदी किनारे की जमीन के लिए लीज समझौता किया है।
रायचक की सुविधा को आधुनिक जहाज निर्माण हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। यहां करीब 200 मीटर लंबे युद्धपोत बनाए जा सकेंगे। इससे GRSE को अगली पीढ़ी के डिस्ट्रॉयर्स के निर्माण से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की क्षमता मिलेगी।
यंत्र इंडिया की सुविधाओं पर 750 करोड़ से ज्यादा निवेश
यंत्र इंडिया के मेटल एंड स्टील फैक्ट्री, इशपोर में दो सुविधाओं पर 750 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्वदेशी धातुकर्म क्षमता और रक्षा विनिर्माण को मजबूत करना है।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से GRSE की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी। इसके साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ने और एमएसएमई क्षेत्र को फायदा मिलने की उम्मीद है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ को बढ़ावा
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में देश की रक्षा जरूरतों को स्वदेशी तरीके से पूरा करने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
उन्होंने कहा कि नए शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट्स ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की नीति को मजबूती देंगे। भारत जहाज निर्माण के साथ रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में भी अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रोजगार और MSME सेक्टर को मिलेगा फायदा
इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। शिपबिल्डिंग से जुड़े सहायक उद्योगों, इंजीनियरिंग इकाइयों और एमएसएमई के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, भारत के सामने आधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाने, निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने जैसी चुनौतियां भी हैं।
अगर प्रस्तावित सुविधाओं का निर्माण समय पर पूरा होता है और एमएसएमई क्षेत्र को इससे प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है, तो भारत के जहाज निर्माण उद्योग को वैश्विक स्तर पर बड़ी मजबूती मिल सकती है। इससे रक्षा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ जहाजों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।